उच्च शिक्षा का ओपिनियन पोल

Amit Raj Singh
यूपी बोर्ड के परिणाम अथवा यूं कहें कि “उच्च शिक्षा का ओपिनियन पोल”
हर साल की तरह एक बार फिर नतीज़े घोषित हुए बहरहाल इस बार बाराबंकी का तिलिस्म टूटा और फतेहपुर जिले ने 10वीं तथा 12वीं दोनों के होनहार दिए।
•लगभग 82 प्रतिशत छात्र इस महाकुम्भ के गोते से हर-हर गंगे होकर, अपने भविष्य की राह पर; आशाओं भरे तमाम सपने संजोने में सफल हुए ।
अब बात मुद्दे की करता हु ,
आमतौर पर हर आम हिंदुस्तानी “गाड़ी” का चुनाव माइलेज और टिकाऊपन देख के करता है, टॉप स्पीड देख के नहीं। ठीक उसी तरह अभिभावक अपने बच्चों में ;उनकी विषय के प्रति गुणवत्ता और मेहनत को तलाशें ,ना कि अन्य बच्चों के द्वारा पहुँचाई गई टॉप स्पीड से विचलित हो। समाज में सर्वथा प्रचलित रूढ़धारणा अथवा स्टीरियोटाइप प्रथा “टॉप रैंकर” द्वारा अपने बच्चे का अंक मिलान, पता नही इससे मिलता क्या है???                                 
मेरे अनुसार ये टॉप रैंकर ,सामान्य चलते ट्रैक पर फ़ॉर्मूला वन श्रेणी की गति से भागते हुए रेसर है और आज के दौर में हर माँ-बाप अपने बच्चे को इसी गति से भागता देखना चाहता है । छात्रों वास्तव में आपको इतना तेज भागना आवश्क नहीं बल्कि आपको इस शिक्षारूपी ट्रैक पर अपनी गाड़ी को अच्छे से ड्राइव करना है। नियमित, निर्बाधित और सतत रूप से
       बस इतना ही; फिर आगे का काम आसान हो जाएगा
और हां तनिक भी विचलित ना हो क्योंकि ये तो बस एक पड़ाव है, ज़िन्दगी ना जाने कितने इम्तिहां लेगी और कितनों के नतीजे आएंगे ।
18% छात्र जो डुबकी मारने से बच गए है वो अगली बार और अधिक ऊर्जा से नदी में उतरे । अपनी नदी है यार ,एक ना एक दिन तैरना सीख जाओगे ।
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