जवाबों की जवाबदेही

Amit Raj Singh
बीते दिन बिहार बोर्ड के नतीजे घोषित हुए ,तमाम मीडिया साहूकार फिर से सवालों का ज़खीरा लेकर पहुँच गए ,प्रॉडिकल साइंस के बाद एक और नए विषय को जन्म देने । खैर शुक्र की बात रही इस बार के टॉपर ने किसी नए विषय का प्रादुर्भाव तो नहीं किया हालांकि उस विषय की बुनियादी सिद्धांतों को चुनौती दी बहरहाल इतना होना तो जायज था । ज्ञान के अधिष्ठाता, व्यास के पंचम वेद और विश्व के सबसे बड़े महाकाव्य को लिखने वाले भगवान श्री गणेश के नामाराशि 42 वर्षीय गणेश कुमार|
मूल्यतः झारखंड के रहने वाले हैं । बिहार बोर्ड के उन 35% भाग्यशाली छात्रों में कला वर्ग में 82.6% प्रतिशत अंक प्राप्त कर शिरोमणि रहे हालांकि सबसे टॉप पर तो विज्ञान वर्ग की खुशबू कुमारी है जिन्होंने 86.2 प्रतिशत अंक हासिल किए है किंतु TRP [SIN-COS] से कहां मिलती , तो पकड़ गए संगीत विद्यार्थी गणेश लेकिन वे तमाम पत्रकार शायद इस विषय की गंभीरता नहीं समझ पा रहे है ,वह इसे इंडियन आइडल के Funny ऑडिशन का एक शो बनाकर पेश कर रहे हैं । उन्हें समझना चाहिए कि यह कोई ढिंचक पूजा का YouTube वीडियो नहीं , ना ही यह KRK की फिल्म समीक्षा है बल्कि यह तो हमारी शिक्षा व्यवस्था का अहम पड़ाव है, जिसमें गणेश कुमार फेल होकर भी पास है और देश के सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक JEE की परीक्षा को पास करने वाले छात्र अपने दुखी हृदय से व्यवस्था के भ्रष्ट पत्थर को पिघलाने के प्रयास में है। जी हां गणेश में ना ही गान है और ना ही ज्ञान कुछ है तो बस जान पहचान , जिससे अमूमन भारत में सब काम आसानी से हो जाते है।
मेरी समझ से परे है कि आये दिन “व्यवस्थाओं की खुलती पोल”
खुलकर स्वतः ही बंद क्यों हो जाती है?
वक़्त के साथ इसका स्वर क्यों धीमा पड़ने लगता है?
    (“व्यवस्था दोषपूर्ण है या हम स्वयं दोषी ” विचार करना होगा)
पर मुद्दा यह है कि उसके द्वारा सवालों पर दिए गए जवाबों का जवाबदेह कौन?
उस विद्यालय का प्रधानाचार्य अथवा प्रबंधक, नकल कराने वाले बिचौलिए ,राज्य का शिक्षामंत्री , स्वयं मुख्यमंत्री या  इकलौता गणेश । मीडिया को गणेश के बजाय जवाब उनसे लेने चाहिए जो इसके प्रति वास्तव में जवाबदेह है ।
अब तक भारत मे नोट से वोट खरीदे जाते थे ,अब तो अंको की खरीद-फ़रोख़्त शुरू हो चुकी है । साहब ये हमारी शिक्षा है ,कोई शेयर मार्केट नहीं और हां यहाँ तो SEBI भी नही जो इन सभी घटनाक्रमों को नियंत्रित करें ।
65 फ़ीसदी छात्रों को फेल कर के सत्ता अपना सीना थपथपा रही है ,नकलविहीन पेपर का सेहरा अपने सिर बांध रही है मंत्री महोदय शिक्षा का मूल उद्देश्य नकल से बचाना नहीं बल्कि बच्चों को पढ़ाना है शर्म आती है कि आप की आंखों में शर्म की झलक भर नहीं दिखती  लॉर्ड मैकाले ने शिक्षा पद्धति क्या कम बिगाड़ी थी, जो आप इसको नए आयाम देने में लग गए है । वहीं दूसरी ओर दसवीं के सीबीएससी के नतीजों में 91 फ़ीसदी छात्र पास होने के बावजूद भी इसे तुलनात्मक रूप से बेहद ख़राब बताया जा रहा है । ऐसी विषमता ,ज्ञान की वज़ह से नहीं व्यवस्था की वज़ह से पैदा हुई है , जो दुर्भाग्यपूर्ण है ।आजकल केंद्रीय सत्ता करो का केंद्रीयकरण करने जा रही है ,मेरा उनसे छोटा सा निवेदन है कि एक देश -एक कर के साथ ही 1 जुलाई से एक देश – एक शिक्षा प्रणाली भी लागू कर दे। ताकि अगला गणेश, भले ही अरिजीत सिंह की तरह सुरीला ना हो , भले वो संदीप सिंह की तरह तबला ना बजा पाये लेकिन वह  शिक्षारूपी संगीत के मधुर तान को समझे और इसके अस्तित्व को बचाने में सक्षम हो ।
Advertisements

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s