मानुषी छिल्लर- ब्यूटी or ब्रेन ?

सवाल यह है कि क्या एक सौन्दर्य प्रतियोगिता में कामयाब रही मानुषी भारतीयों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए ?

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Priti Nonia

हम सबके लिए गर्व का मौका है ।हरियाणा की मानुषी छिल्लर विश्व सुंदरी बनी है । इसमें कोई शक नहीं है की डाक्टरी की पढ़ाई कर रहीं मानुषी ब्यूटी विद ब्रेन हैं ।पर सवाल यह है कि क्या एक सौन्दर्य प्रतियोगिता में कामयाब रही मानुषी भारतीयों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए ।हमारे देश मे खास कर के स्त्रियों के लिए जो मर्दवादी मानसिकता है । जिसमे स्त्री या तो पाँव की जूती है या भोग्या ,उसके तहत कहीं मानुषी की जीत हमारे समाज की लड़कियों के लिए एक बार फिर सुंदरता के छद्म में फंसने का काम तो नहीं करेगी ? इस सवाल के बिनाह पर यह कहा जा रहा है कि सिर्फ सुंदरता के आधार पर मिली कामयाबी को आज की भारतीय नारी की सफलता नहीं मानना चाहिए।

इस चिंता के दो पक्ष हैं ।एक वह जिसमें स्त्री मर्दों के हाथ का खिलौना है ।और अरबों डॉलर वाले सुंदरता के वैश्विक बाजार का उपयोगी माध्यम है दूसरा पक्ष वह है जिसमें यही स्त्री अपनी बुद्धिमता की बदौलत हर दिन नए क्षेत्रों में सफलता के कीर्तिमान स्थापित कर रही है। हालांकि ऐसा करते हुए भी सुंदर दिखने की उनकी इच्छा में कोई कमी नहीं आई है हलाकि हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबरी पर आ जाने के  बाद से उनमें सुंदर दिखने की और उसके लिए दूसरों की तारीफ पाने की इच्छा खत्म हो जानी चाहिए थी। लेकिन सुंदरता की स्वाभाविक चाहऔर आज के कामकाजी माहौल में ऐसा दिखने की अनिवार्यता जैसे पहलुओं ने उन्हें शपथ काम करने की खातिर प्रेरित किया है गांव कस्बों की स्त्रियां भी इसमें पीछे नहीं है TV के प्रभाव व शहरी महिलाओं की देखादेखी ब्यूटी पार्लर जाने का चलन जोर पकड़ रहा है ,महिलाओं की इस चाह का नतीजा है , क्रीम पाउडर, लिपस्टिक ,लिपबाम से लेकर उम्र कम दिखने में मदद करने वाली एंटी एजिंग क्रीमों समेत उन तमाम महंगे सौंदर्य प्रसाधनों का बड़े पैमाने पर प्रचलन बढ़ा है ।

सवाल है कि दैनिक पैमानों पर खुद को सुंदर और स्मार्ट साबित करने वाली लड़कियां क्या वास्तव में हमारी उन लाखों युवक-युवतियों की प्रणाम आनी जानी चाहिए जो शहरों गांव और कस्बों में आज पढ़ाई और खेलकूद जैसे मोर्चों पर जूझ रही है कहीं इसमें उनमें यह संदेश तो नहीं जाएगा कि लड़कियों के लिए प्रार्थमिक जरूरत सुंदर होना है जबकि बुद्धि और कौशल के मामले में श्रेष्ठ होना नहीं ।मानुषी ताज़ा प्रसंग में यह सवाल और भी धारदार हो गया है कि सोशल मीडिया आदि मंचों पर मानुषी की कामयाबी पर प्रश्न चिन्ह लगाए जा रहे हैं वैसे भी ज्यादातर सौंदर्य प्रतियोगिताएं इसीलिए झूठे ठहराई जाती हैं क्योंकि उनमें प्रतिभागी लड़कियों से सिर्फ सुंदर दिखने की अपेक्षा की जाती है और ज्ञान का स्तर नापने के लिए बेहद साधारण सवाल पूछे जाते हैं इन आधारों पर यह साबित करने की कोशिश होती है कि महिलाओं के तर्क और बुद्धि का स्तर पुरुषों से कमतर होता है इसे समाज में एक गलत मानसिकता बनती है कि एक खूबसूरत महिला जो अपनी सुंदरता के प्रति सचेत रहती है दरअसल बेवकूफ ही होती है एक तरफ यह भी है कि ऐसी प्रतियोगिताएं टीवी शो और विज्ञापन रूढ़िवादी सोच को बढ़ावा देते हैं किस से सुंदर देख कर ही जीवन और करियर में आगे बढ़ा जा सकता है। अपने देश में भी त्वचा निखारने वाली क्रीम के विज्ञापनों में यह दिखाने की कोशिश की जाती रही है रंग गोरा होने पर एक लड़की करियर में आगे बढ़ पाती है और बराबरी का बस स्टेटस हासिल कर पाती है जो लड़कों को हासिल होता है ।पूर्वोत्तर के राज्यों में ज्यादातर परिवारों में पुरुषों की जगह महिलाओं के वेतन से घर चलता है यानी परिस्थितियां बदल गई है लेकिन महिलाओं को लेकर समाज की सोच अब भी पुरातनपंथी खाने में जकड़ी हुई है ।

अगर इस बहस को सिर्फ सुंदरता व आकर्षक देखी जाए और उस के इस्तेमाल के पहलू तक सीमित रखा जाए तो भी कहा जा सकता है कि स्त्री शरीर की सुंदरता को उसकी प्रतिभा के आकलन तक सीमित करना गलत होगा असल में सौंदर्य को दो पैमाने पर आ जाना चाहिए एक स्त्री का प्राकृतिक सौंदर्य है यानी जो शरीर और सुंदरता में स्वाभाविक रूप से मिली है और दूसरी सांस्कृतिक सुंदरता है या सांस्कृतिक स्त्री की सोच और उनकी तरक्की की देन होती है ।

जिस तरह देशकाल और परिस्थिति के हिसाब से प्राकृतिक सुंदरता के पैमानों और आकलन में अंतर आया है उसी तरह स्त्री के सांस्कृतिक शरीर के सौंदर्य में फर्क पड़ा है मगर समाज स्त्री सौंदर्य के दूसरे पहलू को पकड़ नहीं पा रहा है। इसलिए जरूरी है कि वक्त के साथ समाज में सुंदरता के मापदंड भी बदल जाना चाहिए और स्त्री सुंदरता के उस पहलू पर जोर दिया जाना चाहिए जिसमें वह देश व समाज के विकास में पुरुषों के बराबर की हिस्सेदारी है। अच्छी बात है कि मिस वर्ल्ड के जिस मंच पर सुंदरता की ज्यादा अहमियत है वहां भी मनुष्य ने अपनी बुद्धिमता का परिचय दिया मां को सबसे ज्यादा सैलरी दिलाने वाले उनके जवाब का हर कोई कायल हो गया यही नहीं मानुषी चिकित्सा की पढ़ाई कर रही है और सब की यही अपेक्षा है की वह आगे चलकर एक सफल डॉक्टर बनेगी।

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